अपनी बात

जिन्दगी के कितने रूप देख डाले ? कभी धूसर अँधियारा जैसे बिन तारों का स्याह आस्मां, कभी उसी अस्मां से चमकती एक रौशनी की किरन ! ओम भैय्या के असमय चले जाने से मन व्यथित हो गया, मानो उस धूसर अंधियारे का रंग और गहरा हो चला हो | खैर …जिन्दगी तो चलानी ही है भले ही दर्द का एक सलीब काँधे पर धरा हो ? फर्क इतना ही पड़ा है की अब इस सलीब का बोझा दुगना हो गया है और मेरी रफ़्तार धीमी | अपने अनकहे दर्द और एहसास को दबा कर रखने से ज्यादा बेहतर मुझे ये ब्लॉग बनाना लगा, सो मेरे दर्द के संसार में आपका स्वागत है | मै जो कुछ महसूस करता हूँ वो सब यहाँ दर्ज करने की कोशिश करूंगा | अपनी प्रतिकियाओं से मुझे अवगत कराते रहे,

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32 Responses

  1. प्रिय संजय, सचमुच अपने अनकहे दर्द और एहसास को दबा कर रखने से ज्यादा बेहतर है ब्लॉग बनाना। ज़ो ज़माने को खुशियां देकर गया उन्हीं का तो विस्तार करना है। मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं।

    • आदरणीय भाई साहब,
      प्रणाम. आपने दिल्ली में रहने के दौरान जो स्नेह, प्यार और संबल दिया है उस का ऋण कैसे चुका पाउँगा ? मुझे नहीं पता ? आपका स्नेह निरंतर बना रहे यही कामना है |

  2. man to abhi bhi nahi manata hai ki munna mama ab nahi hai par jab unki kavitaon pe logo ko thahaka lagate hue dekhta hun to lagta hai ki wo ab bhi yahi hai………

  3. He was a man of words for a common man. A Common man who searches few happy moments in his/her life. Om Bhaiya was the distributor of happiness to the masses. We will miss him Through out our Life. Congrats to you to Start this blog.

  4. संजयजी,
    ओमजी की रचनाएँ अमर हैं. फिर भी आपके और इस ब्लॉग के माध्यम से उनकी स्मृतियाँ हमारे बीच बनी रहें… यही कामना.

    • प्रिय कृतीश जी ! धन्यवाद !
      मेरी कोशिश यही रहेगी की जो रचनाएँ अभी तक लोगों ने ‘पढ़ी’ नहीं है उन्हें सब तक पहुचाया जाये | ओम भैय्या की रचनाओं में कुछ ऐसी रचनाएँ भी है, जो उन्होंने कभी मंच पर नहीं पढ़ी | लोग उन्हें हास्य कवि के रूप में पहचानते है, और उनका खुद का भी मानना था की लोगो अगर समय निकल कर कवि सम्मलेन सुनाने आते है तो उन्हें ‘गंभीर’ कविता सुनना उनके साथ अत्याचार करने जैसा ही होता है, क्यूंकि आम आदमी आज भी नून, तेल और लकड़ी के चक्कर में घनचक्कर बना हुआ है, फिर उसे ‘गंभीर’ कविता का घूँट क्यों पिलाया जाये ? हाँ अगर हास्य की चाशनी में घोल कर कोई सच्ची बात लोगो तक पहुचाई जाये तो उसक मजा ही कुछ और है …. अगर आपने उनकी ‘भूल गए ..” कविता सुनी होतो आपको इस बात का एहसास होगा की मजे मजे में ही वो लोगो के दिल को छू लेते थे | खैर, मै प्रयास करूंगा की उनके गंभीर कवि का रूप उन कविताओं के माध्यम से, जो उन्होंने स्वान्तः सुखाय के लिए लिखी, आप लोगो के सामने प्रस्तुत कर सकूँ..

      कृपया ब्लॉग पर निरंतर आते रहे और अपना मार्गदर्शन और स्नेह देते रहे, टिप्पणिया करना न भूलें, वस्तुतः मै एक IT professional हूँ और भाषा और साहित्य से मेरा इतना ही लेना देना है की मै ओम जी का छोटा भाई भर हूँ…

  5. प्रणाम भाई जी,
    आप से आज पहली बार मुखातिब हो रहा हूँ …………क्या कहू कुछ समझ नहीं आता |
    बस इतना कहना चाहुगा ……………..मैं भी साथ हूँ | एक साल कैसे बीत जाता है पता नहीं चलता फिर वही ८ जून का काला दिन आने को है | आपका दर्द कम कर सकू इतनी तो मुझ में शिफत नहीं पर दुआ जरूर करता हूँ कि आप खुद को इस दर्द को सहने के काबिल बना सके !
    आपका अनुज
    शिवम् मिश्रा
    मैनपुरी , उत्तर प्रदेश

    • प्रिय शिवम् जी,
      बस साथ बने रहिये | विगत एक साल में जो अनुभव हुए है, वो अपने आप में अनूठे और कल्पना से परे रहे है | आप जैसे स्नेह और संबल देने वाले लोग साथ हो तो दर्द की चुभन कम हो जाती है.
      धन्यवाद

  6. संजय भैय्या चरण स्पर्श

    ब्लॉग पढ़कर अच्छा लगा. ओम भैय्या की याद भी बहुत आई. आखें फिर एक बार नम हो गयी. एक किस्सा आपके साथ और सब के साथ बाटना चाहता हू. ये तब की बात है जब में महाराजा कॉलेज में था. सभी वार्षिक उत्सव की तय्यारी कर रहे थे. मुझे दो कार्यक्रमों के बीच में जो खाली जगह होती है उसे भरने के लिए कहा गया था जिसे हम फिलर भी कहते है. मुझे कुछ ऐसा करना था जिससे सभी का मनोरंजन हो. इसीलिए में ओम भैय्या से मिलकर उनके सुझाव लेने के लिए गया. हम शायद २०-२५ मिनट ही साथ रहे होंगे लेकिन उतने कम समय में ही ओम भैय्या ने दो पात्र अटलर और बटलर की रचना कर दी. इतना ही नहीं, उन्होंने मुझे ३-४ अच्छे अच्छे हास्य व्यंग भी बताये जिनसे कार्यक्रम को और ज्यादा मनोरंजक बनाया जा सके. अटलर और बटलर ने लोगो को खूब हँसाया. बटलर का किरदार खुद मैने निभाया था. उसके कुछ दिनों बाद ओम भैय्या मुझे अवंतिका प्लाज़ा में मिले. मैने जब उन्हें धन्यवाद दिया तो हँसते हुए मुझे पूछा ” लोगो को मज़ा आया या नहीं”? जब मैने कहा के बहुत मज़ा आया तो कहने लगे ” फिर धन्यवाद देने की ज़रूरत नहीं”.

    आज जब सोचता हू तो लगता है के जितनी आसानी से उन्होंने हमारे वार्षिक उत्सव में कार्यक्रमों के बीच के खालीपन को हंसी के ठहाको से भर दिया था उतनी ही आसानी से हम सभी की ज़िन्दगी में एक कभी न भरने वाला खालीपन छोड़ गए.

    • प्रिय खोज़ेमा,
      बस अब ओम भैय्या की यादें ही बाकी रह गयी है जो जीने का संबल है| ब्लॉग पर आते रहना और संपर्क बने रहे, प्रयास करना

  7. Bhai,
    This is the best way to put all our grief on blog for “OM Bhaiya” who always wanted us to Laugh but left us with Tears.

    -Deep

  8. bhai,
    aapk dard ko hum samajh sakate hain.om bhai k karan main jaipur me bhi gaurav ka anubhav karta tha. aapne onki yaad ko banaye rakhne ke liye jo pryas shuru kiya hai o jarur safal hoga. Om bhai hamari yaadon me haesha rahenge.onki unsuni kavitayen hum aapke madhyam se sunge. bhagwan Mahakal aapko taqat de.

  9. Dear Sanjay ji,

    Thanks for your information regarding this blog. This is very great work to Tribute to the King of Laughter and happiness. I am very proud of himself as I saw the king of Laughter and happiness.

    Regards,

    Mangesh

  10. jab bhi poha khata hoo to omji ki yaad aa jati hai kahte thai khud ka poha khud hi bhached ri ye ho…our jab mera bahut dino tak koi event nahi dekha to ek din phone kardia muze indore..kya bhai laxman patel aaj kal kya gindola ho giya hai kahi dikhaie aur sunai nahi deta…are bhai apne jinda hone ka proof bhi dete rahho humko…aur na jane kya kya yaade de gaye..sanjay god bless u all…

  11. कई हास्य कवि सम्मेलन सुने हैं, और काका हाथरसी से लेकर चक्रधर जी, सभी की कविताओं पर ठहाके लगाये हैं… लेकिन ओम जी में जो ठेठ मालवीपना था और उनकी बातों का जो चुटीला अन्दाज़ था वह सदैव ही स्मृति में रहेगा…।

    देखते-देखते एक वर्ष बीतने आया… फ़िर से मन उदास हो चला है।

  12. This is the best way to share about OM ji, It will make u relaxed.
    Be relaxed and share his work with others

    Sanjay bharadwaj

  13. He was with me in times of grief , pain , happiness , frustation …. with his ideas to nurture children in our play school , sharing his global experience at home with all humility , emptying his pockets with the money he had earned in kavi sammelan when my father was critical in CHL apollo ….. innumerable instances where he stood by us … you still are with me and inspiring me to go on ….
    Life goes on bhai …Great Blog …..

  14. dear sanjay,
    is dard ko bhi unhi ke andaz me jeeyenge to wo sada vyakt rahenge..jisne rote huye ko hansaya ho…..use yaad kar is jagat ko THAHAKO se gunja dena hi unke prati sachchi shradha hogi kyunki OM shashvat hai,amar hai OM BHAIYA AMAR HAI….. Sanjay tum sangharsh nahi “Saharsh ” karo aur ham sab tumhare sath hai….aseem

    • भाई..
      शायद ये सब दोस्तों की दुआओं का असर था जो मै इस वज्रपात को झेल गया.
      बस साथ बना रहे .. ताकत बनी रहेगी..

  15. Dear Sanjay,
    I did not have very close association with Om Bhaiya but from a distance always observed him and his humour always brought me closer and closer to him.
    I remember for the first time I heard Bhaiya in Tepa Sammelan and then it was an unending journey for him. It was I think four years back when I logged on to Sahara Channel on theTV to watch a program in memory of Late Sh Hariwanshrai Bachchan and just in few minutes realised that it was OM Bhaiya who made Ujjain a national pride with his simple but straight humour. I went on callin my knowns to switch on the TV and hear to his poems.
    It was sad to learn that he breathed his last just after entertaining quite a few of his fans in a program with his poems.
    I do not know what to say but this blog is a true tribute to a tall personality like OM BHAIYA.

  16. Sanjay Bhaiya,
    My first systematc meeting with Om bhaiya took place when he came to pay his condolences in our moments of grief. He was closely associated with Nitin bhaiya but he could sense that I was totally numb and choked. He was sensitive enough to judge that a person whose faith in the Supreme Power has been shaken due to the loss, cannot be consoled with spiritual preachings. So he said Neeta tumhe ek kissa sunata hoon ——
    Once a man who had encountered an earthquake and had lost his family, house and all belongings erected a tent and raised a board in fornt of it saying
    “ALLAH MERE JAAN LE MUJHKO
    MERA NAAM HAI ASLAM SHEIKH
    MAINE TERI TAAQAT DEKHI
    AB TU MERI HIMMAT DEKH”
    These were the words which helped me to gather myself a little and instatntly connected me with Om bhaiya. People know him as a Hasya Kavi but for me his deepest memory date back to the saddest moments of my life when he lent support and strength. I still can feel the power of these words and his magical way of healing. HE IS IMMORTAL. This blog is the right way to fill the vacuum of his physical absence.
    Neeta

  17. Love is stronger than death even though it can’t stop death from happening, but no matter how hard death tries it can’t separate people from love. It can’t take away our memories either…. In the end, life is stronger than death….life gives us brief moments with another…..but sometimes in those brief moment we get memories that last a life time…..

  18. sanjayji,
    aumji ka jana mann mein nastikta ka bhav bhar deta hai.
    lekin aumji hamre manas pe ek atal chhap ban kar hamesha rahenge.

  19. Bhai jus to say Keep it UP .
    Bahut achha laga.

  20. अपने अनकहे दर्द और एहसास को दबा कर रखने से ज्यादा बेहतर मुझे ये ब्लॉग बनाना लगा,-

    ओम जी जब तक रहे, सबको हँसाते रहे और अपना दर्द उन्होंने कभी किसी के सामने जाहिर नहीं किया. उसी परिपाटी को आगे बढ़ाना उन्हें सच्ची श्रृद्धांजलि होगी.

    स्वं ओम जी को श्रृद्धांजलि!!

  21. “ओम” जी तुम बहुत याद आओगे -In loving Memory of “Om Vyas Om”
    Om Ji ko samarpit ye Fan page Facebook par banaya hai. kripya isko join karen.

    http://www.facebook.com/pages/%E0%A4%93%E0%A4%AE-%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%AE-%E0%A4%AC%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%A4-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%86%E0%A4%93%E0%A4%97%E0%A5%87-In-loving-Memory-of-Om-Vyas-Om/195840053769428

  22. mama aapki bhot yaad aate hai…… apne kbhi mjh pita ki kami mehsus nai hone di….. luv you mama and miss you

  23. OP Uncle,

    One thing is very much sure that I never think that you are never with me… Whenever i feel low, I prefer to see your videos and listen to your poems… that gives me immense power and energy to fight back…. Seriously as a mentor, as a guide, as a teacher, you will always be a critical part of my life…

    Lots of Love,
    Anujit (pintu)

  24. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन पं॰ओम व्यास ओम जी को ब्लॉग बुलेटिन की भावभीनी श्रद्धांजलि मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है … सादर आभार !

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